चिद्शक्ति जागरण मिशन

उद्देश्य

१. अपनी चिद्शक्ति को जागृत कर ​​ जीवन की सफलता एवं पूर्णता को प्राप्त करना
२. ​समाज एवम स्वयं के ​ शारीरिक, मानसिक, कार्मिक, सामाजिक, पारिवारिक, आध्यात्मिक, व्यावसायिक, व्यवहारिक संतुलन, एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की प्राप्ति।
३ चारों पुरुषार्थ;​ ​ धर्म​ ,​ ​ अर्थ,​ ​ काम​ और ​ ​ मोक्ष को वैज्ञानिक ढंग से जानने समझने तथा समग्रता से निर्वाह करना​. समाज एवम परिवार में जागरूकता लाना।​

लाभ

1. चित्त की एकाग्रता,​ ​ स्मरण शक्ति में वृद्धि एवं सृजन शक्ति का विकास।
​२. आत्मविश्वास में वृद्धि एवं स्वयं निर्णय लेने की क्षमता का विकास।
​३. पारिवारिक जीवन में शांति​, ​ संतुलन तथा रिश्तो में सामंजस्य।
​४​. युवा​, बच्चो एवं विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास।
​५. चेतना ​एवं चरित्र ​ का विकास तथा सद्गुणों की प्राप्ति
​६. सृष्टि के नियम,​ ​ प्रकृति एवं संस्कृति संरक्षण ,कर्तव्यों ,मूल्यों पर आधारित जीवन शैली।

संकल्प

1. ​नित्य २४ मिनिट चिद्शक्ति जागरण प्रक्रिया द्वारा जीवन जाग्रत एवं संतुलित रखेंगे।​
2. हम ​जागेंगे तो समाज जागेगा, हम प्रकाशित होंगे तो समाज को प्रकाश दे पाएंगे
3. ब्रह्म सर्वव्यापी​ है उसके अनुशासन को अपने जीवन में उतारेंगे ।
4. शरीर ​ मन्दिर​ है इससे समस्त दानवों को दूर रखेंगे एवं जीवन में देव भाव लायेंगे
5. यम एवं नियम को जीवन में यथा शक्ति अभ्यास कर अपनाएंगे। 6. यम अहिंसा, सत्य, अस्तेय चोरी न करना, ब्रह्मचर्य​ एवं अपरिग्रह का पालन ​करेंगें
7. नियम शौच​ (शुद्धि)​ , संतोष, तप, स्वाध्याय तथा ईश्वर प्रणिधान ​करेंगें।
8. आसन: ​जो स्थिरता और सुख देवे उसे पतंजलि आसन कहते हैं नियमित आसन करेंगे।
9. प्राणायाम: ​प्राण मन का राजा है. मन पर विजय पाने हेतु नित्य प्राणायाम करेंगे
10. प्रत्याहार: इंद्रियों ​के पार हो जाना प्रत्याहार है. नित्य इसका अभ्यास करेंगे
11. धारणा: चित्त को ​नित्य एकाग्र करने का अभ्यास करेंगे
12. ​चिद्शक्ति .ध्यान: ​जाग्रति एवं परम आनंद प्राप्ति हेतु नित्य अभ्यास करेंगे
13. ​मैत्री, करुणा, मुदिता रखेंगे और विषमताओं में उपेक्षा का अभ्यास करेंगे
14. सामाजिक ​ मर्यादाओं ​एवम ​ कर्तव्यों का पालन करेंगे।
15. ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी ​ही जीवन का हिस्सा है
16. समाज में ​ सज्जनता​, ​ ​ सादगी​ और ​ स्वच्छता​ रखेंगे।
17. ​अपने नित्य नियम, ​ सद्विचारों और सत्कर्मों को मानेंगे ।
18. ​जो व्यव्हार हमे पसन्द नहीं वह हम दूसरों के साथ भी नहीं करेंगे ।
19. नर- नारी परस्पर पवित्र दृष्टि रखेंगे ।
20. ​जनकल्याण एवम सत्कार्यों के पुण्य प्रसार ​हेतु अपना समय, ज्ञान, पुरुषार्थ एवं धन का एक अंश नियमित रूप से लगाते रहेंगे ।
21. ​मनुष्य एकता एवं समता के प्रति निष्ठावान रहेंगे ।। जाति, लिंग, भाषा, प्रान्त, सम्प्रदाय आदि के कारण परस्पर कोई भेदभाव न बरतेंगे ।

मिशन केंद्र ​स्थापित करने हेतु ​ ​मार्गदर्शन व शर्तें

1. ​चिद्शक्ति जागरण केंद्र तहसील स्तर, जिला स्तर पर स्थापित कर सकेंगें ​
२. प्रत्येक केंद्र की पृथक समिति होगी जो कि प्रदेश या केंद्रीय समिति को महीने के प्रथम दिन को अपनी रिपोर्ट प्रारूप में भेजेगी
३. प्रत्येक केंद्र में निम्न सदस्यगण का निर्माण होगा ​ ​​जिसमे ​ महिला सदस्यों की ​भी ​ सहभागिता अनुशंसनीय है ​​

​बोर्ड की संख्या ११ होगी: १. संरक्षक २. अध्यक्ष ३. उपाध्यक्ष( २ पद) ४. सचिव ५. उपसचिव ६. कोषाध्यक्ष ७. प्रमुख समन्वयक (प्रचार आदि) ८. डाइरेक्टर्स ३ पद एवम अधिकतम ५० कार्यकारी सदस्य होंगे

​४. प्रत्येक रविवार प्रातः १० से ११ बजे सत्संग, साधना व ध्यान सत्र करें : जिसकी रूपरेखा निम्न होगी:
१. सामूहिक प्रार्थना, संकीर्तन ३ मिनिट
२. सामुहिक भजन ३ मिनिट
३. सामुहिक स्वाध्याय: गीता ५ मिनिट
४. प्रवचन १० मिनिट
५. चिद्शक्ति ध्यान प्रक्रिया २५ मिनिट
६. प्रशाद १४ मिनिट
टोटल ६० मिनिट ​५. समिति / सदस्य गतिविधियां एवं विचार विमर्श: ​प्रत्येक माह के प्रथम रविवार प्रवचन के पश्चात
६. २ दिवसीय चिद्शक्ति ध्यान प्रक्रिया कोर्स सदस्यों के लिए अनुशंशित
७. चिद्शक्ति केंद्र की रुपरेखा: किसी भी शुद्ध स्थान में शुरू कर सकते हैं. यदि स्वायत्त कमरा ना उपलब्ध हो तो अपने घर के बैठक हॉल का सदुपयोग कर सकते हैं
१. पूजा गृह: हॉल में: ॐ का चित्र (केंद्र से मंगवाएं)
जो कि ध्यान एवम प्रार्थना हेतु आवश्यक है ​२. ​पूजा अगरबत्ती, धूप व् जोत की थाली
​३. चन्दन पावडर, प्रार्थना के बाद मस्तक पर चन्दन का तिलक लगा कर ही चिद्शक्ति प्रक्रिया में प्रवेश करने से अधिक लाभ होगा
​४. चादर/दरी एवम वयोवृद्ध हेतु कुर्सी का प्रबंध
५. टेप/विडियो/टीवी, प्रवचन/प्रक्रिया मार्गदर्शन हेतु प्रबंध

६. मिशन केंद्र सामूहिक साधना :-
सर्वप्रथम सभी मिलकर एक सामूहिक प्रार्थना संकीर्तन ,ध्यान तत्पश्चात् 24 बार शिव मंत्र का सस्वर सामूहिक उच्चारण/आहुति​,​ सामूहिक ध्यान प्रार्थना में ' सबके लिए सद्बुद्धि एवं सबके लिए उज्ज्वल भविष्य' की भावना हो। सामूहिक साधना से सामूहिक शक्ति पैदा होती है जिससे सामूहिक कार्य सम्भव हो पाते हैं। समूह में साधना करने से सबके मन एक हो​ ​ कर आनंद प्रगट होता हैं।
मिशन केंद्र सामूहिक स्वाध्याय :-
एक सदस्य या तीन- चार सदस्य बारी- बारी से सत्साहित्य के अंश को समझाते हुए पढ़ें और शेष सदस्य ध्यान से सुनें। सत्संकल्प के वचन , पातंजल सूत्रों का पाठ व स्वाध्याय भी किया जा सकता है। (सन्दर्भ पुस्तक -- गुरूजी लिखित ) यह क्रम लगभग 5 मिनट चले।
​८. लोकल समिति हेतु रु११,००० का रिजर्व फंड कायम किया जायेगा। जिसका खर्च समिति की सहमति से, समिति के कम से कम दो पदाधिकारियों के हस्ताक्षरों से बैंक अकाउंट द्वारा अनुशंशित होगा। यह फंड केंद्र की मुख्य विचारधारा द्वारा प्रणीत लोकल क्षेत्र में खर्च किया जायेगा
९. सदस्य को मिशन केंद्र एवम लोकल समिति के प्रति निष्ठावान एवं ईमानदार रहना होगा |
​१०. जातीय भेद-भाव व ऊंच-नीच की भावना दिल से निकाल कर ही मिशन केंद्र में शामिल हों |
​११ . ​लोकल समिति ​को मिशन ​के ​ केंद्र ​के आदेश का पालन हर स्थिति में करना होगा |
4. मिशन ​लोकल ​ केंद्र की बैठक में निर्धारित समय पर उपस्थित होना आवश्यक है |
5. कोई भी सामाजिक या राजनैतिक कार्य करने से पूर्व मिशन केंद्र पदाधिकारी को सूचित करना आवश्यक होगा |
6. मिशन केंद्र के किसी भी सदस्य पर दु:ख या विपत्ति पड़ने पर मिशन केंद्र से जुडे सभी सदस्यों का दायित्व होगा वह अपने दुखी या विपदाग्रस्त साथी की यथासम्भव आर्थिक व सामाजिक सहायता करें |
7. मिशन केंद्र के पदेन सदस्य को कम से कम 100 साधारण सदस्य व 25 सक्रिय सदस्य बनाने होगे तथा सक्रिय सदस्य को कम से कम 25 साधारण सदस्य मिशन केंद्र के साथ जोड़ने होगे |
8. मिशन केंद्र के किसी भी सदस्य या पदाधिकारी को मिशन केंद्र के नियमों के विरूद्ध कार्य करने पर अथवा राष्ट्र विरोधी या असामाजिक गतिविधियों में लिप्त पाये जाने पर उसको मिशन केंद्र से तत्काल निष्कासित कर दिया जायेगा |
9. आप अपने पूर्व अथवा वर्तमान संगठन या पार्टी का विवरण मिशन केंद्र का सदस्य बनने से पूर्व अवश्य दें |
10. सदस्यों को अपनी सदस्यता का वार्षिक नवीनीकरण कराना होगा |
11. सभी प्रकार के दान व सदस्यता पूर्णतया अप्रत्यवर्णीय (Not Refundable) है ।

गतिविधियों की योजना व समीक्षा :-
सामूहिक एवं व्यक्तिगत स्तर पर मिशन केंद्र की ओर से चलाई जाने वाली आगामी गतिविधियों के बारे में विचार विमर्श कर योजना बनाई जाए तथा पिछले सप्ताह की निर्धारित गतिविधियों की समीक्षा की जाए। यथा- स्थानीय स्तर पर साप्ताहिक या पाक्षिक स्वच्छता सफाई अभियान, योग आध्यात्मिक पुस्तकालय बाल संस्कार शाला या अन्य रचनात्मक गतिविधियाँ। अपने- अपने संगठन के सभी सदस्य अपनी सुविधानुसार परस्पर विचार विमर्श करके गोष्ठी का दिन निर्धारित कर लें। अकारण कोई गोष्ठी में अनुपस्थित न हो। संभव हो तो युवाओं, नये सदस्यों को बैठकों में लाने का प्रयास करें।

मिशन केंद्रन के लाभ :-
१. समूह में रहने पर आपका मनोबल ऊँचा बना रहेगा। झिझक नहीं रहेगी। परस्पर एक दूसरे से मिलते- जुलते रहने से सृजनात्मक विषयों पर चर्चा हो पायेगी। इस प्रकार ऊर्जा का स्तर ऊँचा बना रहेगा। आप जो यहाँ से सीखकर जा रहे हैं उस पर दृढ़ और स्थिर रह पायेंगे।
२. अन्य लोग आपके संगठित स्वरूप से प्रेरणा लेंगे। युवाओं के प्रति लोगों के सकारात्मक विचार बनेंगे। क्षेत्र के गाँव के बुजुर्ग आपका सम्मान करेंगे।
३. आप अपने गाँव/मोहल्ले में आदर्श प्रस्तुत कर सकेंगे।

प्रशिक्षकों से :-
उपरोक्त बातें समझाकर सभी शिविरार्थियों को (लड़के/लडकियाँ सम्मिलित) स्थानवार, ग्रामवार, समूह चर्चा के लिए अलग- अलग ग्रुप बनाकर बैठा दिया जाये एवं मिशन केंद्र निर्माण व गतिविधियों को अपने समूह में चलाने हेतु छपे हुए फार्म को प्रत्येक समूह को दे दें। फार्म भरने हेतु निर्देश देकर सबको सामूहिक रूप से गतिविधियों के विषय में समझाते हुए जानकारी दे दी जाए कि वे अनिवार्यतः एवं वैकल्पिक रूप से कैसे तथा किन- किन गतिविधियों को चला सकते हैं। फार्म को भलीभाँति भरने हेतु पर्याप्त समय दें एवं भरे हुए फार्म को एकत्रित कर लें। आयोजकों को उस फार्म के आधार पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन का क्रम चलाने में सुविधा होगी।